कोशिश तो बहुत की जवां वक्त लौटाने की ,
कमवक्त....!
वक्त के साथ साथ सूरत ए हाल भी बदल गए ।
कैसे कटे अब वक्त खामोश होकर ।
हम तो वो थे...!
जिनके आने से महफिल , रोशन हुआ करती थी ।
बदले वक्त में अब , कहां वो नूर रहा ।
पास पास है सब माना मगर ,
दिल से....
हर शक्स हमसे अब , दूर ही रहा ।
शोर बहुत है इस शहर मगर ,
जो पुकारे मुझे चाह से....
वो आवाज अब , मुझसे दूर ही रहा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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