ना जाने क्यों आज मुझे रोने को जी चाह रहा है।
हुआ क्या ऐसा अप्रत्यक्ष, क्यों कुछ भविष्य की गोद में घटित एहसास हो रहा है?
मुझे मेरे किसी अपने के दूर होने का डर सता रहा है।
ना जाने क्यों आज मुझे रोने को जी चाह रहा है। 😔😢
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
ना जाने क्यों आज मुझे रोने को जी चाह रहा है।
हुआ क्या ऐसा अप्रत्यक्ष, क्यों कुछ भविष्य की गोद में घटित एहसास हो रहा है?
मुझे मेरे किसी अपने के दूर होने का डर सता रहा है।
ना जाने क्यों आज मुझे रोने को जी चाह रहा है। 😔😢
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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