हुआ है इश्क तुमसे, न जाने क्यों?
कुछ तो खास बात होगी तुझमें।
वरना ज़माने में हुस्न की, कोई कमी तो नहीं थी ।
आओ करीब और , थाम लो हाथ मेरा ।
कर लूं तुझे खुद में मैं जज़्ब , कुछ इस तरह ।
हो बंद जैसे सीप में , मोती की तरह ।
न फासले रहें दरमियाँ, न कोई परदा हो,
तू मेरी रूह में उतरे, कुछ इस तरह।
कि दुनिया ढूँढती रह जाए तुझे,
और तू मिले मुझमें, एक साए की तरह।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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