हाँ माँ मैने खाया आम कच्चा , मैं हूं तेरा लाडला बच्चा ।
एक आने के लिए फाल्से, दिए बाबा ने केवल चार ।
तुम भी होती संग नानी के , खाती तुम भी आम का अचार ।
नाना ने गाड़ी में बिठाया , मेला सारा हमें घुमाया ।
इक अन्नी का बजा मुझे , मुन्ना को गुब्बारा दिलवाया ।
नाना ने फिर टपरी में जाकर , चाय पकौड़ी और नमकीन खिलवाया ।
हाँ माँ ! सच तुम होती जो संग हमारे ,
चरखी , झूला , नाच कठपुतली का देख कर संग में बजाते ताली ।
शोर-शराबा कहीं हाथी भालू , नाच रही थी बंदरिया मतवाली ।
हाँ माँ मैंने खाया आम कच्चा ,मैं हूं तेरा लाडला बच्चा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

Badia chacha ji
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