बहारों ने अब शायद , मुस्कुराना छोड़ दिया । क्योंकि अब...! उन्होंने हमारे दिल के आंगन में , आना छोड़ दिया । नही थमा करती थीं जिनके कदम कभी , चहल कदमी को हमारे संग । आज संग हमारे चलाना , उन्होंने छोड़ दिया । यूं तो ना पेश आए वो कभी , राह ए मोहब्बत में खुलकर । मगर , अदाओं में उनके मोहब्बत के , पैमाने छलका करते थे । रहता था मस्त "मलंग" देख कर उनके हुस्न ए मयखाने को । उन्होंने आज मोहब्बत का , वो पैमाना तोड़ दिया । उनकी बज़्म में आज , हम है मगर ... उनके तकल्लुफ ने मेरी तरफ , आज मुखातिफ होना छोड़ दिया । बहारों ने अब शायद , मुस्कुराना छोड़ दिया । क्योंकि अब...! उन्होंने हमारे दिल के आंगन में , आना छोड़ दिया । रहेंगी सूनी , सूनी सी , यह दिल की दुनिया अब । रंग ए बहार अब , मेरी जिंदगी के , फीके फीके से , हुए जातें है । मेरे दिन ओ रात अब , उदासियों में घिरे जाते है । देखता है टकटकी भर ,दिल बनकर चकोर , उम्मीदों के आसमां पर । शायद दिख जाए वो कहीं , दिल का चांद.... जिसने अब मेरे शहर में आना छोड़ दिया । बहारों ने अब शायद , मुस्कुराना छो...