तेरा साथ है मेरी जिंदगी , तेरा प्यार है मेरी बंदगी । रहूं दूर तुझसे किस तरह , तुझे पाने की जुस्तजू है मेरी । हो गया है मुझ पर , जिसके के प्यार का असर । वो मेरे यार तुम थी , तुम्हीं तो थी । मेरे दिल की आग को , कौन ये जला गया । थी बुझी जो हसरतें , उसको भी जगा गया । वो कौन थी वो कौन थी , तुम तो थी , तुम्हीं तो थी । बसर जो हमने कर दिया , तुझको अपना मान कर । सूनी पड़ी थी , तब तलक , मेरे दिल ये धड़कने । आए नहीं थे , जब तलक । इस दिल तुम , गहराइयों में । वो मेरे यार तुम्हीं तो थी , जिसने इन्हे धड़का दिया । अपने प्यार के रंग से , जीने का ढंग बतला दिया । रात भर गुजर गई , पहर बदल बदल गया । जिसके प्यार का असर , इस तरह से कर गया । तन कहां , मन कहां ? ना कुछ पता न कुछ खबर , वो मेरे यार कौन था । तुम तो थी , तुम्हीं तो थी । खेलते रहे हम , प्यार की बिसात पर । खुश हुए बहुत हम , अपने दिल को हार कर । जीत जो गया दिल मेरा , वो मेरे यार तुम थी , तुम्हीं तो थी । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी