आ जा आ जा रे साथिया , वो मेरे साथिया । तुम बिन सूना है मेरी रतिया , दिन सूना , सूनी है , दिल की मेरी बगिया । आजा रे ! आजा रे ! हुई क्या मुझसे भूल भी ऐसी , रूठ गई क्यूं , दिल तू मेरी । प्रीत का दामन सूना पड़ा अब , ना कोई बहार है , ना वो मस्त नजारे , दूर गगन में है बस धुंधले तारे । आजा रे ..... जब से मुझसे रूठ गई तू , सो ना सका मैं , जाग भी ना पाया । दर्द छुपाए , तड़प रहा मैं , लेकर दिल में , तेरी यादों का साया । आजा रे आजा रे..... मेरा जीवन , मेरी काया । प्राण तू है , तू ही छाया । चैन भी तू है ,दिल का मेरे , लौट के आजा ओ साथी मेरे । अन्तिम सांसे , जीवन की ये , दरस को प्यासी , तेरी सूरतिया की । राग पुराना , गीत सुहाना आके तुम, संग फिर गुनगुना । आजा रे , आजा रे , साथिया , वो मेरे साथिया ।❤️ ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी