👧धड़कनों में ,बसते है वो । नाम जुबाँ पर लाना , जरूरी नहीं होता । 👦होगा कोई वो , खुश नशीब । जो बन जाये वजह , तेरे दिल के धड़कने की । हो जाऊं मैं वो , ऐसी मेरी तकदीर कहां । 👧उन्हीं से ही इश्क , किया हमनें । दिल का सकून भी , पाया उन्हीं से ही । उनसे मोहब्बत है , यह बयाँ करती है । मेरी ये , आंखें । दिल में बसे हैं जो , पढ़ ले वो । मेरी आँखों में , झाँककर । नाम जुबाँ पर लाना , जरूरी नही होता। अरे पगले , उदास न हो । वो मेरे "वो" तुम्हीं हो । तुम्हीं मेरी चाहत हो । 👦 चल झूठी , मुझे न बना । न खेल मेरे , जजबातों से । तू रहे कहीं और , किसी के । आलीशान , महलों में । वो खाली महल , उलफत का , मेरे दिल में न बना । 👧 तुम्हीं से ही इश्क , किया हमनें । दिल का सकून भी , पाया तुम्हीं से ही । तुमसे मोहब्बत है , यह बयाँ करती है । मेरी ये आँखें । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी